स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू इस वर्ष १७ गुना तेजी से फैल रहा है, तो आप कितने सुरक्षित है?

क्या आप जानते हैं पिछले साल (2016) की तुलना में इस साल (2017) स्वाइन फ्लू 17 गुना तेजी से फ़ैल रहा है? आप ऊपर दिए चित्र के माध्यम से यह समझ सकते है।

जैसा की कहा गया है: Prevention is better than cure (इलाज से बेहतर रोकथाम है), तो इस चित्र को देखकर हमे थोड़ी बहुत चिंता तो होगी पर घबराने की भी जरुरत नहीं है क्योकि अगर हम सावधानी रखे तो इस बीमारी से बचा जा सकता है।

तो आईये आज हम Priya’s View पर जानते है इस बीमारी से जुडी कुछ जानकारियां और इस बीमारी से बचने के उपाय।

स्वाइन फ्लू से जुडी कुछ अफवाहें (Some Rumors Related to Swine Flu):

  • Pork (सूअर का मांस) खाने से स्वाइन फ्लू हो सकता है।
    ऐसा बिलकुल नहीं है।
  • स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं है।
    इलाज है और अगर स्वाइन फ्लू के सिम्पटम्स आने के 48 घंटे के अन्दर इसकी दवा खा ली जाए तो ये काफी हद तक नियंत्रित हो जाता है।
  • यदि गले में खराश के साथ-साथ खांसी और छींक आ रही है मतलब स्वाइन फ्लू हो गया है।
    नहीं, इसका सही पता टेस्ट से ही चलता है।
  • भारत में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए दवाओं की कमी है।
    ऐसा भी नहीं है, भारत में पर्याप्त दवाएं और वक्सीनेशन्स मौजूद हैं।
  • अगर आप 5 साल से अधिक और 65 साल से कम हैं तो आपको स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता।
    ये किसी को भी हो सकता है, पर 5 से कम और 65 से ज्यादा उम्र के लोगों को खतरा अधिक होता है।

क्या है स्वाइन फ्लू? (What is Swine Flu?):

स्वाइन फ्लू क्या होता है, ये समझने से पहले हमें कोल्ड और फ्लू के बारे में जान लेना चाहिए।

इन्फ्लुएंजा, जिसे आमतौर पर “फ्लू” कहा जाता है, एक बेहद संक्रामक, यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैलने वाली सांस से सम्बंधित बीमारी है। यह बीमारी influenza A या B viruses द्वारा फैलती है।

कई बार लोग कोल्ड और फ्लू टर्म को एक ही प्रकार से उपयोग करते हैं, लेकिन दोनों में अंतर होता है।

कोल्ड, जिसे हम सर्दी-ज़ुकाम भी कहते हैं कम खतरनाक होता है और नाक बहने, छींक आने, गले में खराश जैसे परेशानी लेकर आता है.

वहीं दूसरी तरफ फ्लू में शुरूआती दिक्कतें तो कोल्ड जैसी ही होती हैं पर बाद में ये खतरनाक रूप ले लेता है और व्यक्ति तेज बुखार, थकावट और कमजोरी की गिरफ्त में आ जाता है।

इसी फ्लू का एक भयानक रूप है स्वाइन फ्लू जो H1N1 flu वायरस द्वारा होने वाला एक तरह का रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन (श्वसन संक्रमण) है। यह पहली बार 2009 में फैला था और पूरी दुनिया में इसका असर देखने को मिला था। इसके तेजी से फैलने की क्षमता के कारण वही WHO ने August 2010 में इस बीमारी को pandemic, यानी एक महामारी घोषित कर दिया था।

मनुष्यों में पहली बार स्वाइन फ्लू 2009 में मेक्सिको में identify किया गया था।

इस बीमारी का नाम स्वाइन फ्लू नाम क्यों पड़ा?

Swine का अर्थ होता है सूअर, शुरुआत में जब इस डिजीज का पता चला था तब एक ट्रेंड ये देखा गया था कि ये बीमारी अधिकतर उन्ही लोगों को हो रही है जो pigs से कांटेक्ट में रहते हैं। इसीलिए इसका पॉपुलर नाम swine flu पड़ गया। हालांकि कुछ सालों बाद एक नए तरह के वायरस के कारण ये बीमारी उन लोगों को भी होने लगी जिनका सूअरों से कोई लेना-देना नहीं था।

H1N1 स्वाइन फ्लू फैलता कैसे है?

ठीक वैसे ही जैसे सर्दी-जुकाम या सीजनल फ्लू फैलता है। जब इस बीमारी से ग्रसित कोई रोगी खांसता या छींकता है तब वो अनजाने में इस बीमारी के वायरस हवा में छोटे-छोटे बूंदों के रूप में छोड़ देता है। यदि आप इन बूंदों के touch में आ जाते हैं। या उस चीज को छू देते हैं जिस पर ये बूंदें गिरी हैं। जैसे कि दरवाजे की हैंडल, टेबल का सरफेस, etc. कोई ऐसी चीज छू देते हैं जिसे संक्रमित व्यक्ति ने जल्द ही छुआ है तो आपको H1N1 Swine Flu हो सकता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण (Symptoms of Swine Flu):

बुखार, सिर दर्द, साँस फूलना, ठण्ड लगना, डायरिया, उल्टी, गले में दर्द, खराश, थकावट, खांसी, नाक बहना, और छींक आना स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण है, इनके अलावा कुछ लोगो में लाल आँखे, बदन दर्द और भूख न लगना जैसे लक्षण भी देखे जाते है।

इन सभी लक्षणों का होना इस बात की कोई ग्यारंटी नहीं है की आपको स्वाइन फ्लू है पर अगर कोई लक्षण २-३ दिन से अधिक समय से बना हुआ है तो आपको तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

चूँकि कोल्ड और सीजनल फ्लू के लक्षण भी कई हद तक इस बीमारी से मिलते है इसलिए टेस्ट के द्वारा ही इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

स्वाइन फ्लू होने का खतरा किन लोगों को अधिक होता है?

  • 5 साल से छोटे बच्चे।
  • 65 साल से ऊपर के वयस्क, हालांकि 20 से 60 साल के भी बहुत से वयस्कों को ये बीमारी हो रही है।
  • गर्भवती महिलाएं।
  • अस्थमा, हृदय रोग, डायबिटीज, किडनी, लीवर, की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति।
  • ऐसे लोग जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।

स्वाइन फ्लू से बचने के उपाय (Measures to Avoid Swine Flu):

  1. दिन भर में कई बार अपना हाथ पानी से धोएं, खासतौर से जब घर से बाहर हों।
  2. अपने साथ हैंड सांइटिज़ेर रखें और समय समय पर प्रयोग करें।
  3. अपना मुंह, नाक और आँखों को कम से कम छुएं।
  4. सर्दी-जुकाम से ग्रसित लोगों से बचें।
  5. भीड़-भाड़ वाले इलाकों में कम जाएं, यदि जाना भी पड़े तो मास्क का प्रयोग करें। पब्लिक प्लेसेस या ऑफिस में चीजों को कम से कम छुएं।
  6. खूब पानी पियें और पौष्टिक चीजें खाएं ताकि आपकी इम्युनिटी बढ़ सके। इन चीजों को लें:
    • प्याज, लहसुन, अदरक,
    • Citrus fruits, जैसे संतरा, नीम्बू आदि का सेवन अधिक करें।
    • ग्रीन टी, इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स आपकी इम्युनिटी को बूस्ट कर सकते हैं।
    • बिच-बिच में गरम दूध, चाय, सूप इत्यादि लेते रहे। ये मुंह और गले में मौजूद मिक्रोऑर्गैनिस्मस को मार देंगे।
  7. यदि स्वाइन फ्लू का कोई लक्षण दिखे डॉक्टर से कंसल्ट करने में देर ना करें।

मैंने स्वाइन फ्लू की जानकारी देने और उनसे बचाव के लिए यह पोस्ट लिखी है उम्मीद करती हूँ की ये स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए आपके काम आये और आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे।

स्वस्थ्य रहें। धन्यवाद्।

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