संसाधनों पर सभी का अधिकार है

संसाधनों पर सभी का अधिकार है

नमस्ते, आज मुझे आपसे खाने को व्यर्थ में बर्बाद न करने के बारे में बात करना है। शुरुआत मैं स्टोरी से करना चाहती थी जो मेने कहीं पढ़ी थी पर मैं यह नहीं जानती की यह स्टोरी सच है या नहीं इसलिए शुरुआत में मैं आपको ये बताना चाहती हूँ की चाहे यह स्टोरी किसी ने झूठी बनाई हो पर इसका सारांश मुझे बहुत अच्छा लगा इसलिए आपके साथ इसे हिंदी में शेयर करने की सोचा।

खाने को व्यर्थ न बर्बाद करने से सम्बंधित पोस्टर्स हम सबने कहीं न कहीं देखे ही है, पर मुझे उन सारे पोस्टर्स से जितनी सिख नहीं मिली उतनी इस स्टोरी से मिली और मैं चाहती हूँ की आप भी इसे पढ़े और अगर आपको अच्छी लगे तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

रतन टाटा के ट्वीट से:

जर्मनी एक उच्च औद्योगिक देश है ऐसे देश के बारे में बहुत से लोग सोचेंगे कि यहां के लोग एक शानदार जीवन जीते हैं।

जब हम हेमबर्ग (Hamburg / जर्मनी का एक शहर) पहुंचे, मैं और मेरे सहयोगी रेस्टोरेंट में गए, जहाँ मैने देखा बहुत सारी टेबल्स खाली थी। वहां एक टेबल था जहां युवा दंपत्ति खाना खा रहे थे, उनकी टेबल पर केवल दो व्यंजन और बियर की दो बॉटल्स थी। मुझे आश्चर्य था की क्या इतना सिंपल खाना रोमांटिक हो सकता है और क्या यह लड़की इस लड़के को छोड़ देगी।
दूसरी टेबल पर कुछ बूढी महिलाएं बैठी थी, और जब वेटर ने उनको खाना परोसा, उन्होंने अपनी प्लेट का सारा भोजन ख़त्म कर दिया।

जैसा की हम भूखे थे तो मेरे स्थानीय सहयोगियों ने बहुत सारे खाने का ऑर्डर दे दिया। जब हमने अच्छे से खाना खा लिया तब भी हमारी टेबल पर भोजन का एक तिहाई हिस्सा बचा हुआ था।
जब हम रेस्टोरेंट छोड़ रहे थे तब बूढी औरतों ने हमसे इंग्लिश में बात की और हम समझ गए की हमने इतना भोजन बर्बाद किया इसके लिए वे नाखुश थे। तभी मेरे सहयोगी ने उन बूढी औरतों से कहा की “हमने हमारे भोजन का बिल दिया है तो हमने कितना भी भोजन बर्बाद किया हो इससे आपको मतलब नहीं होना चाहिए।”, बूढी औरतें बहुत ही गुस्से में थी उनमे से एक ने अपना फ़ोन निकाला और किसी को फ़ोन किया। थोड़ी देर बाद सामाजिक सुरक्षा संगठन से एक आदमी वर्दी में वहां आया। विवाद क्या था यह जानने के बाद, उसने हमे ५० यूरो का जुर्माना जारी किया। हम सब चुप रह गए।
उस अधिकारी ने हमसे कठोर आवाज में कहा “उतना ही ऑर्डर करे, जितना आप खा सके, पैसा आपका हो सकता है पर संसाधन समाज के हैं, इस दुनिया में बहुत सारे लोग है जो संसाधनों की कमी का सामना कर रहे है। आपको संसाधनों को बर्बाद करने का कोई अधिकार नहीं है।”

इतने अमीर देश के लोगो के विचार ने हम सब को शर्मिंदा कर दिया। हमे सच में इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम ऐसे देश से है जो संसाधनों में इतना अधिक समृद्ध नहीं है। अपनी इज्जत बढ़ाने के लिए हम अधिक मात्रा में भोजन का आदेश दे देते है और जब हम किसी को ट्रीट दे रहे होते है तब भी बहुत अधिक भोजन बर्बाद करते है।

संसाधनों पर सभी का अधिकार है

सबक: हमारी बुरी आदतों को बदलने के बारे में गंभीरता से सोचें।
बहुत सही कहा है – “पैसा आपके पास है, लेकिन संसाधन समाज के हैं।”

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