टहलना जरूरी है …..

चलो टहल आएं, यह एक बहुत सुंदर वाक्य है। किसी के साथ यूँ ही टहलना मन को तो स्वस्थ करता ही है, साथ ही यह तन को भी दुरुस्त रखने का सबसे बेहतर माध्यम है। कहा जाता है की टहलना एक सरल व्यायाम है , पर इसके परिणाम बहुत ही अच्छे होते है। टहलने से आपके शरीर की सभी माँसपेशियाँ सक्रिय हो जाती है।

हमने टहलना कम कर दिया, ऐसे में तन और मन दोनों को तकलीफ है। प्रतिदिन एक घंटा टहलना शरीर के भर को नियंत्रित कर सकता है। एक सामान्य व्यक्ति को अधिकतम 7 किलोमीटर तक चलना चाहिए। अगर आपका घर ऊपरी मंजिल पर है, तो जब भी आप घर जाए तो प्रयास करे कि आप सीढ़ियों के माध्यम से घर पहुंचे। जब भी आप टहलना शुरू करे तो पहले धीमी गति से चले फिर थोड़ी दूर चलने के बाद आप चाहे तो गति बढ़ा सकते है। ज्यादातर लोग औसत गति से चलना चाहते है, ४० वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को 5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा तेज गति से नहीं चलना चाहिए। यदि आप अपने व्यस्त समय में से टहलने के लिए समय निकाल लेते है, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होगा।

इन चीज़ो का भी ध्यान रखे :

  1. कोशिश करे की आप जहा टहलने जा रहे हो वहां प्रदूषण कम से कम हो। अगर वह स्थान हरियाली से युक्त हो, तो बहुत अच्छा रहेगा।
  2. ये भी हो सकता है आप टहलना शुरू करे तो आपकी मांसपेशियों में दर्द उठे, लेकिन इसके भय से आप टहलना न छोड़े, तीन से चार दिन में सब सामान्य हो जाएगा।

लाभ :

  1. टहलने से आपकी मांसपेशियों, हाथों तथा पेट और छाती सहित समुचित शरीर को उचित आकर मिलता है।
  2. यह आपके दिमाग को आराम देते हुए तनाव को कम करता है।
  3. उच्च रक्तचाप पर भी नियंत्रण होता है।
  4. आँखों की रौशनी में मदद करता है।
  5. टहलते हुए मुस्कुराते हुए मित्रों से चर्चा करना सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी है।

 

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