चाय की असली मिठास तो आज घुली है जिंदगी में

असली मिठास: शालिनी के पति ने आज तो उसका हाथ थाम के उसे अपने पास बैठा के एक बार फिर से पूछ लिया “क्या तुम मेरे साथ एक चाय लोगी” ???

शालिनी को एक पल ऐसा लगा जैसे उसकी जिंदगी थम सी गई हो। वो और आदित्य कुछ साल पीछे चले गए हो। और जिस तरह आदित्य ने कुछ साल पहले, पहली ही बार उसको चाय के लिए पूछा था उसको वो सब कुछ याद आने लगा। पल भर वो उन यादो में खो ही गई। आदित्य ने एक चुटकी ली और शालिनी उन यादो से एक दम बाहर निकली और पूछने लगी आज तुमने मुझसे “चाय” के लिए कैसे पूछ लिया ???

आदित्य से रहा नहीं गया और उसने भी कह दिया, शालिनी “हम साथ तो है मगर पहले की तरह नहीं हम कैसे हर एक पल को जीते थे न मगर अब ऐसा भी क्या हो गया है जो हम दोनों ही पहले की तरह नहीं रहे है”।

शालिनी का जवाब आया कुछ तुम भी अपने काम में ज्यादा मशगूल हो गए, कुछ मैं बच्चे की परवरिश में व्यस्त हो गई। तुम पहले की तरह मुझसे प्यार नहीं करने लगे और में पहले की तरह तुम्हारी परवाह नहीं करने लगी। कभी मैं तुम्हे क्या कहना चाहती हूँ और तुम कुछ और ही समझ बैठे बस इसी तरह बढ़ती गई दूरियां और आज हम एक छत के नीचे एक होकर भी एक न रहे।

शालिनी सुनो मैं ऐसे अब और नहीं रह सकता, दम घुंटता है – जब तुम्हे ऐसे उदास और परेशान देखता हूँ। मुझे मेरी गलती समझ आ गई है मैं यह कैसे भूल गया कि मेरी जिंदगी बस ऑफिस का काम ही नहीं है। काम के चलते में तुम्हे भूल सा जा रहा था ये कैसे भूल गया ऑफिस के समय से पहले तुम मेरा टिफ़िन तैयार रखती हो, मेरे कपड़ो को धोकर स्त्री तक करके रखती हो, बच्चे को अकेले ही पूरा दिन संभालती हो और शाम को खाना भी तैयार रखती हो। पूरा दिन तो मुझसे भी ज्यादा व्यस्त रहती हो और फिर भी मेरे पास आकर बैठती हो और मैं तुम्हे समय देने के बजाय सो जाता हूँ या ऑफिस का काम ही करता रहता हूँ। काम की व्यस्तता में मैं इतना स्वार्थी कब बन गया पता ही नहीं चला शालिनी। उम्मीद करता हूँ तुम मुझसे और मेरी बातो को समझ रही हो वर्ना तुम भी तो जानती हो मेरे चंचल स्वभाव को। मुझसे फिर से तुम्हारा वो बेफिक्र और मस्तीखोर पति बनना है और अपने बच्चे का जिम्मेदार पिता।

शालिनी की आँखों में भी ख़ुशी के आंसू थे और बोली मेरी “चाय” कहा है जनाब ???

दोनों ने एक दूसरे को पहले की तरह गले लगाया और फिर एक शालिनी ने आदित्य को कहा ” चाय की असली मिठास तो आज घुली है जिंदगी में। ”

इस आर्टिकल के जरिये मैं आपसे बस यही कहना चाहती हूँ कि काम के चलते आप अपने परिवार को कभी न भूले। आप भले ही अपनी पत्नी या परिवार से खूब प्यार करते हो मगर उन्हें समय समय पर आपके होने का अहसास दिलाते रहे,  उन्हें छोटी-छोटी खुशियों से खुश करते रहे। काम के चलते आपसी सम्बन्ध में कभी दूरिया न आने दे।

आप भी अपनी पत्नी को कभी चाय बना के पिलाए और फिर से अपने रिश्ते में असली मिठास को घोलिये।

 

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