ना कहना भी सिख ले।

हम किसी को भी “ना कहना” बोलने से पहले बहुत ज्यादा ही सोच लेते है, मगर कभी-कभी इतना ज्यादा सोचना हमारे लिए ही हमारे तनाव का कारण बन जाता है। अक्सर हमारी फितरत में यही होता है कि हमें कभी किसी ने कोई काम बताया और हम मना नहीं कर पाते है, यदि हमने मना कर दिया किसी भी वजह से तो सामने वाले को बहुत ही ज्यादा बुरा लग जाता है और वो हमसे कभी-कभी रूठ भी जाता है। और उसके रूठ जाने के डर से हम उसका काम कर भी देते है चाहे हम करना चाहते हो या नहीं भी, मगर हमें काम तो करना ही है। तो क्या हम ना शब्द भी उस व्यक्ति को नहीं कह सकते।  क्या वो कभी हमारी मजबूरी नहीं समझ सकता ??

आजकल तनाव हर दूसरे व्यक्ति में देखने को मिल रहा है चाहे वो ऑफिस में काम करे, चाहे वो घर पर रह रही महिला ही क्यू न हो। ये तनाव बहुत ही ज्यादा बढ़ने से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से भी कमजोर होता चला जाता है। वो भी इसीलिए की हम जो काम नहीं कर सकते या नहीं करना चाहते उसका भी हम पर प्रेशर बनाया जाता है। और हमारी कमजोरी की हम ना नहीं कह पाते इसीलिए ना कहना सीखो और जो नहीं है आपके बस में, आप मत करो उस काम को मना  कर दीजिये।

रीना जब शादी होकर ससुराल में आई थी तब वो बहुत ही सीधी-साधी लड़की थी, सीधी वो आज भी है मगर अब वो ना कहना सिख गई है और वो अब पहले से ज्यादा खुश भी है क्यूंकि वो अब किसी के रूठने, किसी के बात न करने का ज्यादा तनाव नहीं लेती है। जब दूसरे उसे या उसके हालत नहीं समझते तो भला वो भी क्यों समझे ?? रीना पहले हर एक काम के लिए, हर एक बात के लिए हाँ कह दिया करती थी मगर जब एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने क कारण उसने उसकी ननद को एक कुर्ते में सिलाई लगाने को मना क्या कर दिया मानो आज वो दुनिया की सबसे बुरी इंसान बन गई थी। बस एक ना शब्द से उसके पुरे परिवार वालो का तो मानो रुख ही रीना के लिए बदल गया था। रीना को तब जाकर समझ में आया कि जब वो पहले कभी किसी को मना नहीं कर पाती थी तब वो सभी के लिए बहुत ही अच्छी थी। मगर आज एक ना शब्द से इतनी बुरी हो गई कि कोई उससे बात करना भी पसंद नहीं कर रहा था। रीना की तबियत पहले भी खराब तो रहती थी मगर वो इस डर से बीमार रहते हुए भी काम  करने के लिए  मना नहीं  करती थी, की कोई उससे बुरा न मान जाए। मगर अब क्या इस बार तो उसकी हालत भी न थी तो कर दिया उसने मना, क्या हो गया अगर उसने ना शब्द कह भी दिया तो। क्या उसकी ननद उसकी तकलीफ या बीमारी को नहीं समझ सकती थी ?? रीना को अब ये तो समझ आ चूका था की दुनिया में कैसे मतलबी लोग रहते है जिनकी सोच सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ हल करवाने की है। किसी की मजबूरी या हालत लोग नहीं समझते है उनको तो बस अपना काम कैसे हो बस इसी से मतलब है।
अब रीना बिलकुल बदल चुकी है वो भी अब ऐसे ही जरूरत मंद लोगो की मदद करती है जो वाकई मदद के लायक है। बाकि वो अब ना शब्द कहने में बिलकुल भी हिचकिचाती नहीं है।

“ना कहना” बोलने के फायदे-

  1. हम वैसे तो किसी को भी कोई भी अर्जेंट काम करने के लिए ना कहना पसंद नहीं करते है मगर आपकी कोई पर्सनल काम या कोई आपकी ही मजबूरी है तो आप तुरंत उसे ना कह दे।
  2. किसी को भी ना कहने से सामने वाले का व्यक्तित्व जरूर हमें पता चलता है। ये ही वो हालात होते है जिसमे ये पता चलता है कि ये व्यक्ति हमें भी समझ रहा है या नहीं ??
  3. किसी को भी ना शब्द कहने से हिचकिचाए नहीं।
  4. ना शब्द आपको बहुत ही ज्यादा तनाव से मुक्त रखता है क्यूंकि ना कहने के बाद हमारे सिर पर किसी काम का बोझ नहीं रहता वो भी उस काम का जो हमारा है ही नहीं।
  5. ना कहने से पहले आप कुछ भी नहीं सोचे की व्यक्ति को हमारे ना कहने के बाद केसा लगेगा। हम भी यूँही ना तो नहीं कह रहे ह न हम भी कुछ काम में व्यस्त है या हमारा मन नहीं है उसके काम को करने का।

हमें अगर स्वस्थ रहना है तो लोगो के गुस्से, उनका हमसे बात न करना वो भी एक ना कहने से। तो आप ऐसे लोगो पर ज्यादा ध्यान न देकर अपने आप को तनाव और चिंता से मुक्त रखिये। ऐसे लोगो के बारे में सोच कर कोई फायदा है भी नहीं। जो आपको नहीं समझते जो आपकी केयर नहीं करते आप मत सोचिये ऐसे लोगो के बारे में।
मगर हाँ जो आपकी बीमारी से, आपके हालात से थोड़ा भी दुखी हो या परेशान हो आप उनको कभी भी ना मत कहिये, ये ही वो लोग है जो आपका हमेशा साथ निभाएंगे आपके अच्छे और बुरे समय में।

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