पार्किंसन नाम की इस बीमारी को कैसे पहचाने ??

जी हाँ पार्किंसन बीमारी को मेरे किसी अपने ने बहुत करीब से देखा है और वो इस बीमारी से जूझ भी रहा है। यह बीमारी अक्सर ५० की उम्र पार कर चुके लोगो को होती है। मगर अब २५ फीसदी देश के मरीज़ ४० साल की उम्र के लोगो में भी देखि जा रह है। इसकी तादाद दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।

इस बीमारी के फैलाव को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रति सावधानी बरतने के लिए इसके लिए एक डे निर्धारित किया गया है। 11 अप्रैल को वैश्विक तौर पर वर्ल्ड पार्किंसंस डिज़ीज़ डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को इसके प्रति सचेत रहने के लिए जागरुक किया जाता है। मेरे अपने करीबी जब इस बीमारी को कई डॉक्टर को बताया तब ये बीमारी किसी को समझ नहीं आई फिर जाकर मशहूर डॉक्टर को जब वो बताने गए तब पता चला की इस बीमारी को पार्किंसन कहते है और उनका सामना इस बीमारी से हो चूका है। यह बीमारी ताउम्र रहती है बहुत ही कम चांस रहते है की यह ठीक हो जाए।

जी हाँ वो जो मेरे अपने है वो मेरे ही पापा है। मेने जब से उनको देखा है वो हमेशा एक्टिव , फुर्तीले , सबका ख्याल रखने वाले हम उनको कह सकते है। मगर उन्होंने कभी अपने शरीर पर ध्यान नहीं दिया सबके लिए जीते रहे। आज वो इस बीमारी से ग्रसित है बहुत खराब लगता है उनको ऐसे देखते हुए। यह बीमारी बहुत ज्यादा तनाव लेने से होती है। इस बीमारी में इंसान अपना कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता है उसे खाना खाने, पानी पिने , नहाने हर एक काम में बहुत ही ज्यादा तकलीफ होती है

इस आर्टिकल के जरिये मैं इस बीमारी से होने वाले लक्षण और इसकी रोकथाम आपको बताने जा रही हूँ ताकि कभी आपका कोई अपना इस बीमारी से ग्रसित न हो। आज जो मैं अपने पापा को देखती हु कल को कोई भी बच्चा अपने पापा को ऐसे न देखे।

जाने पार्किंसन बीमारी के लक्षण:

  1. पसीना बहुत ही अधिक आता है, पंखे की हवा भी असर नहीं करती है।
  2. रोजमर्रा के काम करने में परेशानी आने लगती है।
  3. पेशाब करते वक़्त पेशाब रुक रुक कर आता है।
  4. इनको अकेले बैठने की आदत सी हो जाती है भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करते है।
  5. अचानक चलते हुए झटके लगते है और चलते हुए संतुलन नहीं बना पाते है और गिर जाते है।
  6. आवाज भी बहुत ही धीमी हो जाती है। आवाज कंपकंपाने, लडख़ड़ाने, हकलाने लगती है।
  7. हाथो, पेरो में कंपकंपाहट होने लगती है और कुछ भी काम करते वक़्त शरीर पर भी संतुलन नहीं रहता है।
  8. आँखे चोड़ी रहती है पलके झपकना कम हो जाती है मनो किसी को घूर रहा हो।
  9. खाना खाने और निगलने में तकलीफ होती है।
  10. चेहरा भावशून्य हो जाता है।
  11. मुँह से लार निकलती है।

आसान नहीं होता पार्किंसन बीमारी को पहचानना:

इस बीमारी को पहचानने के कोई टेस्ट आज तक नहीं हुए है। इस बीमारी को बताए हुए लक्ष्णों से ही पहचान सकते है। अगर आपको भी यह महसूस हो या आपके किसी परिवार के सदस्य को यह बीमारी हो तब आप को भी जरूरत है एक अच्छे डॉक्टर की सलाह की और अच्छे इलाज की।

इन चीजों से रहे बिलकुल दूर:

हर बीमारी में आपको ये तो बताया जाता है कि किस चीज का सेवन करना चाहिए। लेकिन ये कोई नहीं बताता होगा की किस चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। जबकि ये चीज सबसे ज्यादा जरूरी है। पार्किंसन बीमारी के लक्षणों को कम करने के लिए इन चीजों का सेवन बिल्कुल भी न करें।

  1. खमीर युक्त तथा सुखे हुए मांस-मछली
  2. बासी खाना
  3. बहुत दिनों पहले की रखी हुई चीज़
  4. खमीर-युक्त पत्तागोभी
  5. सोया उत्पादित खाद्य पदार्थ जैसे टोफू, सोया सॉस
  6. बीयर व रेड वाईन

ये जरूर खाएं:

  1. ताजे फल और सबिजयां
  2. फाइबर रेशे युक्त भोजन
  3. दूध और बादाम

डॉक्टर की सलाह:

इस बीमारी में इंसान का शरीर ज्यादा वर्कआउट नहीं कर पाता। इसीलिए डॉक्टर सलाह देते है कुछ हलके व्यायाम करने की और नियमित घूमने की। और इसमें दवाइया एक बार शुरू होते ही ताउम्र दवाइया लेनी पड़ती है।

कोशिश करे की आप तनावमुक्त रहे, अपने स्वास्थ्य पर खूब ध्यान दे। खूब योग करे , और अच्छा हेल्दी खाना खाए।

आप स्वस्थ, आपका परिवार स्वस्थ।

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